अंबिकापुर/ दिनांक 5 मार्च को रहनुमा एजुकेशनल सोसाइटी अम्बिकापुर की जानिब से माह-ए-रमजान की बरकतों और रहमतों के दरमियान एक भव्य और गरिमामय दावत-ए-इफ़्तार का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल रोज़ा इफ़्तार का अवसर था, बल्कि समाज में आपसी मोहब्बत, भाईचारे, इंसानियत और आपसी सौहार्द के पैग़ाम को मज़बूत करने का एक खूबसूरत प्रयास भी था।

इस गरिमामय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरगुजा राजपरिवार के सदस्य एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी. एस. सिंह देव साहब की सम्माननीय उपस्थिति रही। इसके साथ ही विशेष अतिथि के रूप में दीपक झा (आईजी सरगुजा) तथा राहुल बंसल (सीएसपी अम्बिकापुर) भी इस नेक और पवित्र आयोजन में शरीक हुए।

कार्यक्रम में शहर के विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु, समाजसेवी, बुद्धिजीवी वर्ग तथा अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह आयोजन अपने आप में गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक एकता की एक खूबसूरत मिसाल बनकर सामने आया, जहाँ हर मज़हब और हर तबक़े के लोगों ने एक साथ बैठकर रोज़ा इफ़्तार किया और आपसी भाईचारे का पैग़ाम दिया।

रोज़ा इफ़्तार के मुबारक मौके पर देश में अमन-ओ-शांति, तरक्की, खुशहाली, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे की मजबूती के लिए विशेष दुआ की गई। साथ ही यह भी दुआ की गई कि हमारा देश हमेशा प्रेम, सद्भाव और इंसानियत के रास्ते पर आगे बढ़ता रहे और समाज में आपसी नफ़रत की जगह मोहब्बत और भाईचारे का माहौल कायम रहे।
कार्यक्रम को सफल और यादगार बनाने में रहनुमा एजुकेशनल सोसाइटी के पदाधिकारियों और मेंबरों ने पूरी लगन, समर्पण और टीम भावना के साथ शानदार मेहनत की। विशेष रूप से शफी अहमद मोहम्मद इस्लाम (अध्यक्ष), रशीद अहमद (महासचिव), डॉक्टर फैजुल हसन, मसूद आलम, मेराज गुड्डू, हाजी अख्तर(चम्मा) भाई, प्रोफेसर मोo शब्बीर, प्रोफेसर जुनैद, हाजी यासीन फ़िरदौसी, डॉक्टर तनवीर, शकील अहमद, हामिद साहब,इरशाद खान, अबुल वफ़ा, गुलशेर खान, सादिक हुसैन, रिज़वानुल्लाह कुरैशी और सलीम अंसारी का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा। इन सभी की सक्रिय भागीदारी और अथक प्रयासों से यह आयोजन अत्यंत सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
इस दावत-ए-इफ़्तार का मूल उद्देश्य रमजान के पाक महीने की बरकतों के साथ समाज में प्रेम, भाईचारा, इंसानियत और आपसी सद्भाव के संदेश को फैलाना है। इस आयोजन ने यह साबित किया कि जब समाज के लोग मिलकर नेक इरादों के साथ आगे बढ़ते हैं तो आपसी दूरी खत्म होती है और मोहब्बत व एकता का माहौल मजबूत होता है।
ऐसे आयोजनों से न केवल धार्मिक और सामाजिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है बल्कि समाज को यह सीख भी मिलती है कि अमन, भाईचारा और इंसानियत ही किसी भी सभ्य समाज की असली पहचान होती है।



