(रमज़ान आदेश विवाद पर स्पष्टता, जवाबदेही एवं क्षमायाचना की मांग) रशीद अहमद अंसारी
अम्बिकापुर / छत्तीसगढ़
रमज़ान माह जैसे पाक और बरकतों भरे समय में जारी कथित आदेश को लेकर प्रदेश में जो भ्रम और विरोधाभास की स्थिति बनी है, उससे रोज़ेदारों की भावनाओं को गहरा आघात पहुँचा है। एक ओर छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जनाब सलीम राज द्वारा जारी पत्र में रमज़ान के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को एक घंटा पूर्व कार्यालय छोड़ने की अनुमति शासन द्वारा दिए जाने की बात कही गई, वहीं दूसरी ओर राज्य शासन के आधिकारिक विभाग ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

इन परस्पर विरोधी बयानों ने अल्पसंख्यक समाज — विशेषकर छत्तीसगढ़ के मुस्लिम समुदाय — को गहरी पीड़ा और असमंजस में डाल दिया है। पवित्र रमज़ान में इस प्रकार की भ्रामक जानकारी का प्रसार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे समाज की भावनाएँ आहत हुई हैं।

मैं स्पष्ट रूप से यह कहना चाहता हूँ कि जनता को सच जानने का पूरा अधिकार है। यदि किसी स्तर पर बिना आधिकारिक पुष्टि के आदेश जारी किया गया या भ्रामक सूचना प्रसारित हुई, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है।
साथ ही, मैं जनाब सलीम राज जी को सलाह देता हूँ कि भविष्य में किसी भी प्रकार का आदेश या पत्र जारी करने से पूर्व पूरी तरह विचार-विमर्श एवं आधिकारिक पुष्टि कर लें, ताकि समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
इस पाक महीने में जो स्थिति बनी है, वह अत्यंत खेदजनक है। यदि इस प्रकरण में कोई त्रुटि हुई है, तो संबंधित पक्ष को मुस्लिम समाज से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए, ताकि विश्वास और पारदर्शिता कायम रह सके।
हमारी मांग है कि:
1. पूरे मामले पर स्पष्ट और लिखित स्पष्टीकरण जारी किया जाए।
2. जिम्मेदारी तय कर उचित कदम उठाए जाएँ।
3. भविष्य में ऐसे संवेदनशील विषयों पर विशेष सावधानी और पारदर्शिता बरती जाए।
रमज़ान अमन, सब्र और भाईचारे का पैग़ाम देता है। उम्मीद है कि सभी संबंधित पक्ष इस पवित्र माह की भावना का सम्मान करते हुए स्थिति को स्पष्ट करेंगे और समाज के विश्वास को पुनः स्थापित करेंगे।
रशीद अहमद अंसारी
अध्यक्ष
जिला कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग
सरगुजा, अंबिकापुर
छत्तीसगढ़



