(केंद्रीय बजट 2026–27 के संदर्भ में)
केंद्रीय बजट 2026–27 में अल्पसंख्यक मामलों GB के मंत्रालय के लिए ₹3,400 करोड़ का आवंटन किया गया है, जिसमें तालीम (शिक्षा), बुनियादी ढांचा, प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) और हुनरमंदी (कौशल विकास) पर विशेष ज़ोर दिया गया है। यह बजट मुसलमानों समेत तमाम अल्पसंख्यक तबकों के लिए एक मौका (Opportunity) है, बशर्ते हम इसे समझें और सही तरीके से इसका फायदा उठाएँ।
छात्र एवम मदरसा प्रकोष्ठ तमाम मुसलमान भाइयों और बहनों से पुरज़ोर अपील करती है कि:
= तालीम को अपनी पहली तरजीह बनाएँ
सरकार द्वारा शिक्षा के लिए आवंटित बजट का लाभ उठाने हेतु बच्चों और नौजवानों को स्कूल, कॉलेज, मदरसा आधुनिकीकरण, स्कॉलरशिप और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की ओर प्रेरित करें। तालीम ही हमारी तरक़्क़ी (Progress) की बुनियाद है।
= सरकारी योजनाओं की सही जानकारी हासिल करें
PM जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) के तहत बनने वाले स्कूल, छात्रावास, आईटीआई, स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाओं के लिए स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें। जानकारी के अभाव (Lack of Awareness) की वजह से हक़ से महरूम न रहें।
= महिलाओं और युवाओं को आगे लाएँ
अल्पसंख्यक महिलाओं और युवाओं के लिए हुनरमंदी, स्वरोज़गार और आत्मनिर्भरता की योजनाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। ख़वातीन (महिलाएं) और नौजवान क़ौम की ताक़त होते हैं।
= संगठन और एकजुटता को मज़बूत करें
अपने इलाक़े में सामाजिक संगठनों, मस्जिद कमेटियों और शिक्षण संस्थानों के ज़रिये सामूहिक रूप से आवेदन, प्रस्ताव और माँगपत्र (Representation) प्रस्तुत करें। तफ़र्रुक़ (बिखराव) छोड़कर इत्तेहाद (एकता) को अपनाएँ।
= हक़ के साथ ज़िम्मेदारी भी समझें
सरकारी मदद को एहसान नहीं, बल्कि अपना संवैधानिक हक़ समझें और उसका इस्तेमाल क़ानून, पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ करें।
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच छात्र एवम मदरसा प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ यह मानती है कि अगर मुसलमान समाज जागरूक (Aware), संगठित और शिक्षित होगा, तभी यह बजट काग़ज़ों से निकलकर ज़मीन पर नज़र आएगा।
= आइए, तालीम, तहज़ीब और तरक्की के रास्ते पर चलकर अपने मुस्तक़बिल (भविष्य) को मज़बूत करें।



