सीतापुर क्षेत्र में किसानों के द्वारा रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से होने वाले दुष्परिणामो से बचाने के लिए एवं संतुलित उर्वरक प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए नैनो उर्वरकों का आविष्कार किया गया है। किसानों को इस नई वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग करके नवाचार करने की आवश्यकता है। नैनो उर्वरकों के प्रयोग विधियों को समझने और समझाने की आवश्यकता है।जिससे प्रतिवर्ष उर्वरकों की नगण्य आपूर्ती के विकल्प के रूप में इस स्वदेशी तकनीक (मेड इन इंडिया) उर्वरक को जिसे FCO में शामिल किया गया है, वैसे उर्वरक आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत आने के कारण, इससे जुड़े कंपनियों को अनेक जांच प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, भारत सरकार के अनेक कसौटियों के कसावट के पश्चात कृषि वैज्ञानिकों ने नैनो उर्वरकों को किसानों के लिए लॉन्च किया है। नैनो उर्वरक आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने हेतु किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम भूमिका साबित होगी और विष मुक्त कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
सहकारी समितियों या निजी उर्वरक विक्रेताओं द्वारा अन्य कृषि आदान सामग्रियों के साथ दबाव पूर्वक लदान अथवा टैग करके नहीं बल्कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग विधियों की उचित जानकारी देकर किसानों को प्रोत्साहित करते हुए बीज उपचार , जड़ उपचार, और पत्तियों में उचित मात्रा में छिड़काव करने से नैनो DAP, नैनो यूरिया, नैनो जिंक आदि को विभिन्न निंदनाशकों और कीटनाशकों के साथ स्प्रे किया जा सकता है।
नैनो उर्वरकों के खरीदी पर दुर्घटना बीमा के रूप में किसानों को 10000 दस हजार रुपए की राशि दी जाती है।
500 ml नैनो DAP + 25 kg दानेदार DAP के प्रयोग से 1275 रुपए मात्र की लागत में एक एकड़ की खेती की जा सकती है।
जिससे किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन और अधिक मुनाफा मिल सकता है।
इस नैनो उर्वरक जागरूकता कार्यक्रम में IFFCO के उप महाप्रबंधक छ ग श्री सुधीर सक्सेना, SDO कृषि श्रीमती अनिता एक्का और प्रमुख वैज्ञानिक KVK डॉ राजेश चौकसे , डॉ प्रदीप लकड़ा, डॉ सूरज पंकज, डॉ शमशेर आलम, सीतापुर अनुविभाग के तीनों SADO, ADO, समस्त RAEO और उर्वरक निरीक्षक संतोष कुमार बेक उपस्थित थे।।



